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मेरी अनसुलझी कविताएँ

कुछ यक्ष प्रश्न है मेरे संवाद अधूरा है हमारे दरमिया जो मिल गया वो अपूर्ण है जो प्राप्त नही उसकी चाह है शून्य है ब्रह्मांड यह तो किसकी खोज में मानव है वो ईश्वर तो निराकार है ...
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