मेरी अनसुलझी कविताएँ September 06, 2017 कुछ यक्ष प्रश्न है मेरे संवाद अधूरा है हमारे दरमिया जो मिल गया वो अपूर्ण है जो प्राप्त नही उसकी चाह है शून्य है ब्रह्मांड यह तो किसकी खोज में मानव है वो ईश्वर तो निराकार है ... Read more